आजकल ऑनलाइन अकाउंट में लॉगिन करने का तरीका बदल रहा है. पहले जहां पासवर्ड याद रखना जरूरी था, वहीं अब मोबाइल पर आने वाला OTP और फिंगरप्रिंट से काम करने वाला Passkey जैसे ऑप्शन इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इनका मकसद अकाउंट तक पहुंच को आसान बनाने के साथ सुरक्षा बढ़ाना भी है, हालांकि दोनों तरीकों में एक बड़ा अंतर है. ऐसे में साइबर ठगी के बदलते तरीकों के बीच यह समझना जरूरी है कि कौन-सा तरीका फिशिंग जैसे हमलों से बेहतर बचाव करता है, तो आइए डान जानते हैं कि OTP और Passkey में क्या अंतर है, साथ ही अकाउंट की सुरक्षा कैसे बेहतर होती है. OTP कैसे काम करता है? OTP यानी वन टाइम पासवर्ड एक ऐसा कोड है, जिसका इस्तेमाल एक बार लॉगिन या किसी ट्रांजैक्शन की पुष्टि के लिए किया जाता है. यह आमतौर पर SMS, ईमेल या ऑथेंटिकेटर ऐप के जरिए मिलता है. इसकी मदद से पासवर्ड चोरी होने की स्थिति में भी अकाउंट को सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मिल सकती है, हालांकि OTP की सुरक्षा इस बात पर भी निर्भर करती है कि कोड कैसे बनाया और पहुंचाया जा रहा है. SMS के जरिए आने वाले कोड SIM स्वैपिंग और नेटवर्क से जुड़ी कमजोरियों के कारण जोखिम में पड़ सकते हैं, वहीं फिशिंग वेबसाइट पर OTP दर्ज करने से साइबर अपराधी उसका इस्तेमाल असली वेबसाइट पर लॉगिन करने के लिए कर सकते हैं. Passkey क्या है? Passkey पासवर्ड के बिना लॉगिन करने का एक तरीका है. इसमें यूजर फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या डिवाइस PIN की मदद से अपनी पहचान की पुष्टि कर सकता है. यह तकनीक Apple, Google और Microsoft जैसे टेक प्लेटफॉर्म पर सपोर्ट की जाती है. Passkey बनाते समय डिवाइस दो क्रिप्टोग्राफिक की तैयार करता है. इनमें पब्लिक की वेबसाइट के पास रहती है, जबकि प्राइवेट की
Source: ABP Technology
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