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Explained: आशुतोष रांका-सौरव दास को पुलिस कब छोड़ेगी? प्रिवेंशन और सामान्य अरेस्ट में अंतर समझें

Explained: आशुतोष रांका-सौरव दास को पुलिस कब छोड़ेगी? प्रिवेंशन और सामान्य अरेस्ट में अंतर समझें

दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के तीन सदस्य आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्या शिंदे को आज सुबह गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद तीनों को SEM कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने आशुतोष रांका, सौरव दास को पांच दिनों की पुलिस न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इन तीनों को दिल्ली पुलिस ने प्रिवेंटिव अरेस्ट किया था. पुलिस का कहना है कि ये तीनों बिना इजाजत जंतर मंतर पर पहुंचे गए थे और प्रदर्शन करने लगे थे जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन तीनों को कब छोड़ा जाएगा और ये डिटेंशन प्रिवेशन क्या है. ये आम गिरफ्तारी से अलग कैसे है. आइए समझते हैं. दरअसल प्रिवेंटिव अरेस्ट एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति को अपराध करने से पहले ही हिरासत में ले लिया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए अपराध के लिए सजा देना नहीं होता, बल्कि समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी संभावित अपराध या खतरे को रोकने के लिए उसे एहतियातन हिरासत में रखना होता है. प्रिवेंटिव अरेस्ट को समझिए समान्य कानूनी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को तब गिरफ्तार किया जाता है जब उसने कोई अपराध किया हो या उस पर अपराध करने का पुख्ता संदेह हो. लेकिन प्रिवेंटिव अरेस्ट में केवल इस आशंका या अंदेशे के आधार पर कार्रवाई की जाती है कि वह व्यक्ति भविष्य में राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या शांति के लिए खतरा पैदा कर सकता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 में प्रिवेंटिव अरेस्ट से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं. इसके तहत राज्य को यह अधिकार मिलता है कि वह सुरक्षा, राष्ट्रीय अखंडता और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए किसी व्यक्

Source: ABP India

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