केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA और DR दोनों काफी अहम हैं. जब महंगाई बढ़ती है तो उसका असर घर के बजट पर भी पड़ता है. ऐसे में कर्मचारियों को उनकी सैलरी पर महंगाई भत्ता यानी DA मिलता है, जबकि रिटायर हो चुके कर्मचारियों को पेंशन पर महंगाई राहत यानी DR दी जाती है. दोनों का काम तो महंगाई के असर को कम करना है, लेकिन ये अलग-अलग लोगों को मिलते हैं. अब 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में सवाल है कि DA और DR में आखिर क्या अंतर है, इनकी गणना कैसे होती है और नए वेतन आयोग का इन पर क्या असर पड़ सकता है. आइये जानते हैं. DA क्या होता है?DA यानी Dearness Allowance को हिंदी में महंगाई भत्ता कहते हैं. ये केंद्र सरकार के नौकरी कर रहे कर्मचारियों को दिया जाता है. इसका मकसद बढ़ती महंगाई के कारण रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ने वाले असर से कुछ राहत देना है. जैसे अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपए है और DA की दर 60% है, तो उसे हर महीने 18000 रुपए महंगाई भत्ता मिलेगा. यानी बेसिक सैलरी और DA को मिलाकर रकम 48,000 रुपए हो जाएगी. केंद्र सरकार आम तौर पर साल में दो बार DA की दर में बदलाव करती है. जनवरी 2026 से लागू दर के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों का DA बेसिक पे का 60% है. अगली बढ़ोतरी के बारे में आखिरी फैसला सरकार की ऑफिशियल घोषणा के बाद ही माना जाएगा. DR क्या होता है?DR यानी Dearness Relief को हिंदी में महंगाई राहत कहते हैं. ये रिटायर हो चुके सरकारी कर्मचारियों और फैमिली पेंशन पाने वाले लोगों को दी जाती है. इसका मकसद भी वही है कि बढ़ती महंगाई के बीच पेंशन की खरीदने की क्षमता को बनाए रखने में मदद करना. जैसे मान लीजिए, किसी
Source: ABP Business
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