कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने रविवार (11 अक्टूबर, 2026) को विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की पुलिस हिरासत में लेने की कार्रवाई की तीखी आलोचना की है. इसके साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर दिए गए निर्देशों का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और कुछ अंतरिम निर्देश भी जारी किए. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि अदालत के निर्देशों का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा, ‘भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 देश के लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और सरकार की तरफ से दिए गए किसी भी दबाव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस और बाद में सिविल सोसाइटी के कुछ एक्टिविस्टों की तरफ से किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को सरकार ने बहुत ही सख्त तरीके से दबाया है.’ लोगों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान निर्माताओं ने दिया- तिवारी इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि जब देश के नागरिकों को सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से रोका जाता है, तो यह कदम देश के लोकतंत्र को कमजोर करती है. चंडीगढ़ में न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘यह बहुत अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और कुछ अंतरिम निर्देश जारी किए हैं. मुझे उम्मीद है कि कोर्ट की तरफ से दिए गए निर्देशों का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और सरकार नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करेगी. क्योंकि ये वो अधिकार हैं, जो संविधान के निर्माताओं ने इस देश के नागरिकों को दिए हैं.’ #WATCH |
Source: ABP India
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