20 साल पहले स्वर कोकिला ( लता मंगेशकर) ने एक आखिरी फिल्मी गीत गाया, जिसको सुनते ही थिएटर में रोने लगे थे लोग. प्रसून जोशी के बोल ने मां और बेटे की दूरी के दर्द को इतनी बखूबी पेश किया कि आज भी ये गाना सुनते ही आंखे नम हो जाती हैं. एआर रहमान के संगीत में ये गाना आज भी यादगार है.
Source: NDTV Hindi
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