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रेगुलेटर घुमाते ही कैसे बदलती है पंखे की बिजली खपत? जानें टेक्नोलॉजी

रेगुलेटर घुमाते ही कैसे बदलती है पंखे की बिजली खपत? जानें टेक्नोलॉजी

गर्मी और उमस के दिनों में पंखे की स्पीड कम-ज्यादा करना हमारी रोज की आदत है. तेज हवा चाहिए तो रेगुलेटर बढ़ा देते हैं और हल्की हवा के लिए स्पीड कम कर देते हैं. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या धीमी स्पीड पर पंखा चलाने से बिजली का बिल भी कम होता है. इसका जवाब पंखे की स्पीड के साथ-साथ उसमें लगी मोटर और रेगुलेटर की टेक्नोलॉजी पर भी निर्भर करता है. अलग-अलग तरह के रेगुलेटर बिजली की खपत को अलग तरीके से कंट्रोल करते हैं. ऐसे में सिर्फ पंखे की स्पीड कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि आपका पंखा किस तकनीक पर काम करता है और स्पीड बदलने पर उसकी बिजली की खपत में कितना अंतर आता है. तो आइए जानते हैं कि रेगुलेटर घुमाते ही पंखे की बिजली खपत कैसे बदलती है. रेगुलेटर घुमाते ही पंखे की बिजली खपत कैसे बदलती है पंखे की बिजली खपत उसकी मोटर, रेगुलेटर और चलने की स्पीड पर निर्भर करती है. आमतौर पर तेज स्पीड पर मोटर ज्यादा बिजली खर्च करती है, जबकि कम स्पीड पर खपत घट सकती है, हालांकि यह बदलाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि पंखे में किस तरह की मोटर और रेगुलेटर लगा है. पुराने रेगुलेटर में बिजली की अतिरिक्त एनर्जी गर्मी के रूप में बर्बाद हो सकती है. वहीं आज इस्तेमाल होने वाले कैपेसिटिव रेगुलेटर वोल्टेज को कंट्रोल करके बिजली की बर्बादी कम करते हैं. पुराने और नए रेगुलेटर में क्या है अंतर? पुराने रेसिस्टिव रेगुलेटर बिजली की अतिरिक्त एनर्जी को गर्मी में बदल देते हैं. ऐसे में पंखे की स्पीड कम करने के बावजूद बिजली की खपत ज्यादा रह सकती है. जैसे 75 वॉट का पंखा इस तरह के रेगुलेटर के साथ कम स्पीड पर भी लगभग पूरी बिजली खींच सकता है. इसके मुकाबले कैपेसिटिव रेगुलेटर बिजली की खपत कम करने म

Source: ABP Technology

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