बाजार में फ्रंट लोड और टॉप लोड दो तरह की वॉशिंग मशीनें मिलती हैं. इन दोनों का काम कपड़ों की गंदगी हटाना है, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक अलग होती है. इसी वजह से पानी की खपत, बिजली का इस्तेमाल, कपड़ों की देखभाल और धुलाई में लगने वाला समय भी अलग हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मोटर से लेकर पानी तक फ्रंट लोड और टॉप लोड मशीनें कैसे काम करती हैं. ड्रम में कपड़े घूमने से कैसे होती है सफाई? फ्रंट लोड वॉशिंग मशीन में कपड़े सामने की तरफ लगे दरवाजे से डाले जाते हैं. इसमें ड्रम घूमते समय कपड़ों को ऊपर उठाता है और फिर नीचे गिराता है. बार-बार होने वाली इस प्रक्रिया से कपड़ों पर लगा मैल निकलने में मदद मिलती है. इस तरीके में पानी भी कम इस्तेमाल होता है. वहीं टॉप लोड मशीन में कपड़े ऊपर से डाले जाते हैं. इसमें सफाई के लिए दो तरह की तकनीक मिलती है. पहली में ड्रम के बीच लगा एजीटेटर कपड़ों को घुमाकर साफ करता है, जबकि दूसरी में नीचे लगा इम्पेलर कपड़ों को आपस में रगड़ने के लिए गति पैदा करता है. एजीटेटर वाली मशीन में कपड़ों पर ज्यादा खिंचाव पड़ सकता है, जबकि इम्पेलर वाला ऑप्शन इस अंतर को कुछ कम कर सकता है. पानी की खपत में कितना होता है अंतर? पानी के इस्तेमाल के मामले में फ्रंट लोड मशीनें आमतौर पर आगे रहती हैं. आंकड़ों के मुताबिक, एक फ्रंट लोड मशीन एक धुलाई में करीब 40 से 50 लीटर पानी इस्तेमाल करती है. इसके मुकाबले पारंपरिक टॉप लोड मशीन में लगभग 120 से 150 लीटर पानी लग सकता है. इम्पेलर वाली टॉप लोड मशीन की खपत करीब 80 से 100 लीटर हो सकती है. हालांकि असली खपत मशीन के मॉडल, उसकी क्षमता और चुने गए वॉश प्रोग्राम पर निर्भर करती है. ऐसे में खरीदारी से पहले समान क्षमता वाली मशीन
Source: ABP Technology
Comments
Log in to commentNo comments yet. Be the first!