अगर आप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो रूस का यह फैसला आपके लिए अहम है. रूस ने डीजल निर्यात पर लगी पाबंदी में कुछ ढील देने का फैसला लिया है. इसका मतलब है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की सप्लाई करना आसान हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद उठाया गया है. इस फैसले का खास मकसद विदेशी बाजारों में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के साथ रूस में घरेलू जरूरतों को भी पूरा करना है. हालांकि, इससे डीजल की कीमत कितनी कम होगी, यह मांग और सप्लाई पर निर्भर करेगा. रूस ने डीजल निर्यात पर क्यों हटाई पाबंदी? रूस का कहना है कि उसके यहां डीजल का उत्पादन घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ दूसरे देशों को सप्लाई करने में भी इससे मदद मिलेगी. रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के मुताबिक, सरकार तेल कंपनियों के साथ मिलकर डीजल के निर्यात और सप्लाई की व्यवस्था करेगी. दरअसल, यूक्रेन की ओर से रूसी ऊर्जा ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए थे. इससे रूस की कुछ तेल रिफाइनरियों का काम प्रभावित हुआ. इसके कारण देश में डीजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी. इसी वजह से रूस ने पहले डीजल के निर्यात पर पाबंदियां लगाई थीं, जिसे अब हटाने का फैसला लिया गया है. क्या है पुतिन और ट्रंप के बीच डीजल सप्लाई की डील? रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और अमेरिका के बीच डीजल की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर सहमति बनी है. इसके तहत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डीजल की अतिरिक्त खेप भेजने की प्लानिंग है. शुरुआती चरण में करीब 5 लाख मीट्रिक टन डीजल की आपूर्ति का जिक्र किया गया है. रिपोर्टों में अक्टूबर में 3 लाख टन, न
Source: ABP Business
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