1990 के दशक के शुरुआती वर्षों 1993 के बाद से प्रदर्शनकारियों को संसद और सत्ता के गलियारों के पास अपनी बात रखने के लिए अनौपचारिक रूप से जंतर-मंतर रोड पर शिफ्ट कर दिया गया. तब से यह जगह देशभर के आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और सामाजिक मुद्दों की आवाज बन गई थी.
Source: Aaj Tak
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